अपना देश
यह अपना देश है प्यारे, यह अपना देश है प्यारे
यहाँ इंसान बेघर हैं , खुदा के घर बहुत सारे
यह अपना देश है प्यारे, यह अपना देश है प्यारे
नचाते हैं जो इंसानों को ऐसे भी मदारी हैं
यह वाइज़ मस्जिदों के, मंदिरों के वह पुजारी हैं
हजारों बखशिशें हैं फैज़ के चश्मे भी जारी हैं
मगर फ़िर भी जिधर देखो भिकारी ही भिकारी हैं
नज़र आते हैं ता-हद्दे नज़र गुरबत के नज़्ज़रे
यह अपना देश है प्यारे, यह अपना देश है प्यारे
यहाँ पर भूख से बच्चे बिलक उठते हैं रोते हैं
यहां पर सुब्ह को लोग उठ के मुंह अश्कों से धोते हैं
यहां मजदूर मेहनत कर के मज़दूरी भी खोते हैं
हज़ारों आदमी फुटपाथ पर रातों को सोते हैं
तरसते हैं यहाँ जीने को भी अफ्लास के मारे
यह अपना देश है प्यारे, यह अपना देश है प्यारे
यहाँ मिलती नही है दाद आहों की पुकारों की
कोई कीमत यहाँ लगती नहीं उल्फत शेआरों की
बड़ी तादाद रहती है यहाँ आफत के मारों की
हुकूमत है यहाँ मिल मालिकों, सर्मायादारों की
यहाँ चाराग्रों के रहम पर रहते हैं बेचारे
यह अपना देश है प्यारे, यह अपना देश है प्यारे