इंसान (The Man)

                नाएबे खल्लाके आलम दहर में इंसान है
                (विश्व में नायब खुदा का बस येही इन्सान है)
                वाकिफ़े इंजील ओ गीता हामिले कुरान है
इस को बख्शा था खुदा ने अर्फाओ आला मका़म
और हर मख़्लूक पर लाज़िम था उस का एहतराम
जन्नातुल फ़िरदौस में रहता था बासद एह्तशाम
बा अदब हो कर मलाएक उस को करते थे सलाम
                लेकिन अपनी ज़िद में उसने हुक्म ए रब ठुकरा दिया
                ख़ुद हुआ बदनाम और हौवा को भी रुसवा किया
इब्तिदा से आज तक करता रहा यह सरकशी
फेर दी हाबील की गर्दन पे भी इसने छुरी
आदतों में इसकी दाखि़ल शर पसंदी ही रही
धीरे धीरे बन गयी आख़िर ख़ुदा इसकी ख़ुदी
                इस ने इंसां हो के इंसानों को समझा जानवर
                खूने नाहक़ से किए रंगीन हजारों बामो दर
नूह के तूफां में भी डूबी न इसकी खुदसरी
अज़्मे इब्राहीम से टकराई फ़िकरे आज़री
रंज युसूफ को दिए इसने बशाने दिल्बरी
बिल्मुका़बिल हज़रते मूसा थी इसकी सहिरी
                था फ़क़त बन्दा मगर ख़ुद साख़्ता माबूद था
                हाँ येही शद्दाद  था फ़िरऔन  था नमरूद था
कंस हो कर जिबह करवाता था मर्दो ज़न येही
कृष्ण को ललकारता था बन के दुर्योधन येही
दुश्मने दीं कातिले तह्ज़ीबो इल्मो फन  येही
राम की पाकीज़गी के सामने रावन येही
                मोहतरम खातून सीता को यह बहकाता रहा
                इसकी  इस हरकत पे ख़ुद शैतान शर्माता रहा
सर पे यह आरा ज़करिया के चला कर खुश हुआ
इब्ने मरयम को येही सूली दिला कर खुश हुआ
ज़हर का सुकरात को प्याला पिला कर खुश हुआ
नेक इंसानों को यह जिंदा जला कर खुश हुआ
                हक़ परस्तों को सताया और सज़ा ऐ दार दी
                 इस ने नाथू बन के गाँधी जी को गोली मार दी
दौरे नौ में अहदे वहशत की यह जिंदा यादगार
आज भी शैखो ब्रहमिन बन के है मसरूफ कार
साफ गोई हक़ बयानी से हमेशा इस को आर
दूसरों को गलियां देना है बस इसका शेआर
                अपनी तक़रीरों से पैहम ज़हर फैलाता है यह
                भाइयों  को भाइयों के खूं में नहलाता है यह
काश अब भी होश आ जाए कहीं साहिर इसे
पर्चमे अम्नो अमां दुनिया में लहराने लगे
बढ़ के ख़ुद हर एक भाई से गले भाई लगे
और जहाँ का ज़र्रा ज़र्रा मुस्कुरा कर कह उठे
               ज़ीनते कौनो मकां ऐ फ़ख्रे आदम ज़िंदाबाद
               खिज़्रे दौरां पैकरे इन्सानिअत पाइंदाबाद   

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