जाहिल

October 23, 2007 at 9:14 am (Uncategorized)

आकिल है अगर कोई तो आकिल कहिये
कामिल है अगर फन में तो कामिल कहिये
लेकिन यह सुखन याद रहे ए  साहिर
जाहिल को न भूले से भी जाहिल कहिये

1 Comment

  1. champak said,

    वाह क्या लिखा है हाश्मी साब..
    क्या आप मुझे सिखायेंगे ये उर्दू शेर-ओ-शायरी …मैं तो फिलवक्त थोड़े ही शब्द प्रयोग करता हूँ..बड़ी दिली तमन्ना है..इन्हें समझने की..सीखने की और इनपर अपनी कविता में अमल करने की………

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