नादान

November 7, 2007 at 10:16 am (Uncategorized)

                पहले देखो है लिखा क्या मेरे अफसाने में
                तुम तो आ जाते हो हर शख्स के बहकाने में
तुम अभी आए हो आते ही यह जाना कैसा
चंद लम्हे तो ठहेरते मेरे गम खाने में
                तुम को मालूम भे है , तेरे असीराने सितम
                आफिअत अपनी समझ बैठे हैं मर जाने में
लोग बरहम नज़र आते हैं खुदा खैर करे
मुझ से क्या कोई खता हो गयी अनजाने में
                सब को यकसां मिले पीने को , बहुत मुश्किल है
                कारफर्मा है सियासत अभी मैखाने में
सिर्फ़ कहने के लिए नामे ख़ुदा है लब पर
सैकड़ों बुत हैं अभी दिल के सनम खा़ने में
               वाइजो़ शैख़ न सुधरेंगे कभी ऐ साहिर
               वक्त ज़ाया न करो तुम इन्हें समझाने में

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