मजदूर ( LABOUR )
यह मेहनत कश मजदूर नहीं अनमोल रत्न हैं भारत के
गर्मी से इनके इरादों की फौलाद पिघलने लगता है
एक जुम्बिशे अबरू पर इनकी हर सांचा ढलने लगता है
इन के ही भरोसे हर सनअत का काफ्ला चलने लगता है
और देश का नक्शा इनकी ही कोशिश से बदलने लगता है
यह मेहनत कश मजदूर नहीं अनमोल रत्न हैं भारत के
सैलाब में किश्ती खेते हैं तूफानों से टकराते हैं
हो राह में चाहे कोहेग्रां यह आगे बढ़ते जाते हैं
दुनिया में किसी भी मुश्किल से डरते हैं न घबराते हैं
पतझर के मौसम में भी यह फूलों के गीत सुनाते हैं
यह मेहनत कश मजदूर नहीं अनमोल रत्न हैं भारत के
(फौलाद : लोहा, सनअत: धंधा ,किश्ती: नाव, कोहेग्रां: मुश्किलों का पहाड़ ),